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दोहे




हिंदी दोहे


1.
ऐसे    हैं    संसार   में , कुछ -एक धन-कुबेर !
जिनकी नजरों एक से , तुलसी  और  कनेर !!
2.
बहस करें ये  बेतुकी , बातें  बेबुनियाद !
टीवी  चैनल   बाँटते , धर्म भरा उन्माद !!
3.
टीवी चलती बहस  से , सीख  मिली  बेजोड़ !
नहीं बात का तोड़ तो ,  रुख मसले का मोड़ !!
4.
रिश्तों  में  संशय  बढ़ा , घटा प्रेम आधार !
घर आँगन में  उग गई , घृणा भरी दीवार !!
5.
चले गए   वो   लाम  पर , बिना सुने जज़्बात !
वो  गिनते  हैं  दिन  वहाँ , यहाँ गिनें हम रात !!
6.
वैद्य    हुआ   हैरान  ये , कैसी  मानव  देह !
मन  में  है  कटुता भरी , रोग हुआ मधुमेह !!
7.
घोल  दिए  हैं  वात  में , हमने    कितने   रोग !
फिरे   वही  ये  बाँटती , फिर काहे  का  सोग !!
8.
जाट  कहे  सुन जाटनी , है  खतरे  में  पाग !
 टीवी भी  सिखला रहा , अच्छे  होते  दाग !!
9.
इस अंधे कानून की ,   मूढ़   लगी    करतूत !
चोर  ढोर दोनों मिले , फिर  भी  चाह सुबूत !!
10.
रामायण  पढ़  देख  लो , छुपा यही  संदेश !
राम  नहीं  अभिमान ने , मारा  था  लंकेश !!
11.
रामायण  पढ़  देख  लो , छुपा यही  संदेश !
राम  नहीं  अभिमान ने , मारा  था  लंकेश !!
12.
मुकर गए कर वायदा , यही  आपका  दोष !
बोलो जन समुदाय में , क्यों  ना  पनपे रोष !!
13.
देते  घर  के  देव  को , जो  सत्तू  का  भोग !
रहते घर  ना  घाट के , जग  में  ऐसे  लोग !
14.
करना  बेहद  मान  तुम , है  बस  ये  इसरार !
इतना भी  झुकना  नहीं , गिर  जाए  दस्तार !!
15.
जो  जन  चौकीदार  से , पूछ   रहे  थे  फ़र्ज़ !
उन सब पर ही लूट का , हुआ  मामला दर्ज !!
16.
लुटी  आब  को  दाम  दें ,  देख राज का काज !
झुलसे  का  ये  आग  से , करने  लगे  इलाज !!
17.
देते  हैं   हर  बार  हम  , उनको  बढ़िया भोज !
लेकिन वह पकवान में ,  लेते   कंकड़   खोज !!
18.
यही   लुटेरा  कोष  का , कहे  दरोगा  ढीठ !
पकड़े ककड़ी चोर  को , ठोंके अपनी पीठ !!
19.
देख कहीं पर बाढ़ ने , हाल    किया   बेहाल !
और कहीं बरसात ये , बनकर खड़ी  सवाल !!
20.
आँखों  से  आँसू  बहें , उपजा  मन  में  मोद !
लगता है अब आदमी , सचमुच एक विनोद !!
21.
मिले  सफलता   किस  तरह , उस जन  को  श्रीमान !
जिसने  मुश्किल  काम   को ,  लिया  असंभव  मान !!
22.
दूषित जब से जल हुआ , हुई   प्रदूषित   वात !
होनहार    बिरवान    के  ,  तब से  पीले पात !!
23.
रसना दे  जिनको मिला , बोलन का अधिकार !
चलती  बात उसूल  की  , होते   वही    शुमार !!
24.
देख  आइना  हाथ  में , बढ़ा  भूप  का  कोप !
राजद्रोह के जड़ दिए  , हम  पर  ही  आरोप !!
25.
कठपुतली हैं हम सभी , रंग मंच    संसार !
लौटें   सब    नेपथ्य में , कर पूरा किरदार !!
26.
एक  कमी   है  आप   में , मत  होना  नाराज !
कह कर अपनी बात  की ,  रखते नाहीं लाज !!
27.
सच को सहना सीख लो , ठीक  नहीं  है रोष !
अपना  यारो  कब  किसे , दिया दिखाई दोष !!
28.
मिलते  हैं  अब  जेल में , सुख सुविधा के ढेर !
भोग    रहे आराम   से  , कातिल धनी दिलेर !!
29.
देना सबका  साथ तुम , लेना कभी  न आड़ !
एक  चने  से  तो  नहीं , कभी  फूटता भाड़ !!
30.
कर   देते   हो    फैसला , बिन ही  तहक़ीक़ात !
जान  गए अब आप भी ,  पैसे   की   औक़ात !!
31.
हृदय विदारक  रुदन से , पनपी   ऐसी  पीर !
दर्द  बहा  हर  आँख से , बनकर खारा नीर !!
32.
करे  सियासत एक  दिन , उसको  मटियामेट !
भरना  आया   ही   नहीं , जिसे  बात  से  पेट !!
33.
कह दे मन की  बात को , रहा   जिसे  तू  सोच !
लगते   हैं    थोड़े    भले , नमक  और  संकोच !!
34.
धीरज   उसमें  धर  सखे , जो   है   तेरे   पास !
देख   गगरिया   ग़ैर  की , बढ़ा रहा क्यूँ प्यास !!
35.
नयनों   में   धनवान   के , जब जब उतरा ख़ून !
नज़र  मिलाते  ही  हुआ , अंधा    ये     कानून !!
36.
भ्रष्ट   सियासत   में   हुए ,  भ्रष्टाचारी   पंच !
आज  पाप  के  बोझ   से , लगे  टूटने  मंच !!
37 .
बनते  झटपट  काम  सब , उसके   ही   श्रीमान !
पैसे   जिसके   पास   या , ऊपर  तक  पहचान !!
38.
घर भी उसको ही मिला , मिला  उसे  ही  घाट !
जब   उसने   दरबार  में , लिया थूक कर चाट !!
39.
कैसा   है   ये   आदमी , मुझे   बताओ   मीत !
रहता  है  जो  शहर  में , रचे  गाँव   के  गीत !!
40.
आकर  ज़र ने  बीच  में , बदले  यूँ   हालात !
लेख  लेखनी लिख  गई , पकड़ी गई दवात !!
41.
मिले  सफलता   किस  तरह , उस जन  को  श्रीमान !
जिसने  मुश्किल  काम   को ,  लिया  असंभव  मान !!
42.
दूषित जब से जल हुआ , हुई   प्रदूषित   वात !
होनहार    बिरवान    के  ,  तब से  पीले पात !!
43.
रसना दे  जिनको मिला , बोलन का अधिकार !
चलती  बात उसूल  की  , होते   वही    शुमार !!
44.
देख  आइना  हाथ  में , बढ़ा  भूप  का  कोप !
राजद्रोह के जड़ दिए  , हम  पर  ही  आरोप !!
45.
कठपुतली हैं हम सभी , रंग मंच    संसार !
लौटें   सब    नेपथ्य में , कर पूरा किरदार !!
46.
एक  कमी   है  आप   में , मत  होना  नाराज !
कह कर अपनी बात  की ,  रखते नाहीं लाज !!
47.
सच को सहना सीख लो , ठीक  नहीं  है रोष !
अपना  यारो  कब  किसे , दिया दिखाई दोष !!
48.
मिलते  हैं  अब  जेल में , सुख सुविधा के ढेर !
भोग    रहे आराम   से  , कातिल धनी दिलेर !!
49.
देना सबका  साथ तुम , लेना कभी  न आड़ !
एक  चने  से  तो  नहीं , कभी  फूटता भाड़ !!
50.
कर   देते   हो    फैसला , बिन ही  तहक़ीक़ात !
जान  गए अब आप भी ,  पैसे   की   औक़ात !!
51.
हृदय विदारक  रुदन से , पनपी   ऐसी  पीर !
दर्द  बहा  हर  आँख से , बनकर खारा नीर !!
52.
करे  सियासत एक  दिन , उसको  मटियामेट !
भरना  आया   ही   नहीं , जिसे  बात  से  पेट !!
53.
कह दे मन की  बात को , रहा   जिसे  तू  सोच !
लगते   हैं    थोड़े    भले , नमक  और  संकोच !!
54.
धीरज   उसमें  धर  सखे , जो   है   तेरे   पास !
देख   गगरिया   ग़ैर  की , बढ़ा रहा क्यूँ प्यास !!
55.
नयनों   में   धनवान   के , जब जब उतरा ख़ून !
नज़र  मिलाते  ही  हुआ , अंधा    ये     कानून !!
56.
भ्रष्ट   सियासत   में   हुए ,  भ्रष्टाचारी   पंच !
आज  पाप  के  बोझ   से , लगे  टूटने  मंच !!
57 .
बनते  झटपट  काम  सब , उसके   ही   श्रीमान !
पैसे   जिसके   पास   या , ऊपर  तक  पहचान !!
58.
घर भी उसको ही मिला , मिला  उसे  ही  घाट !
जब   उसने   दरबार  में , लिया थूक कर चाट !!
59.
कैसा   है   ये   आदमी , मुझे   बताओ   मीत !
रहता  है  जो  शहर  में , रचे  गाँव   के  गीत !!
60.
आकर  ज़र ने  बीच  में , बदले  यूँ   हालात !
लेख  लेखनी लिख  गई , पकड़ी गई दवात !!
61.
किया समय  के  यक्ष  ने , ऐसा   कठिन    सवाल !
दूर    मुझे   लगने   लगा ,  सुख सुविधा का ताल !!
62
घर भी उसको ही मिला , मिला  उसे  ही  घाट !
जब   उसने   दरबार  में , लिया थूक कर चाट !!
63.
आकर  ज़र ने  बीच  में , बदले  यूँ   हालात !
लेख  लेखनी लिख  गई , पकड़ी गई दवात !
64.
कठपुतली हैं हम सभी , रंग मंच    संसार !
लौटें   सब    नेपथ्य में , कर पूरा किरदार !!
65.
कर   देते   हो    फैसला , बिन ही  तहक़ीक़ात !
जान  गए अब आप भी ,  पैसे   की   औक़ात !!
66.
अपनों  ने कुछ यूँ  किया  , नफरत का  छिड़काव !
संबंधों    के    खेत     में  , पनपा    नहीं   लगाव !!
67.
मेरी   ये   तकदीर  भी , निकली  बड़ी  अजीब !
अपनों  ने  मारा  तभी , छाया    हुई      नसीब !!
68.
बातों    में   लच्छे    नहीं , नहीं   जीभ  में   लोच !
मिले सफलता किस तरह ,  यही  रहा वह  सोच !!
69.
बिल्ली अब भागी  फिरे , नहीं  छुपन  की ठाँव !
सिखा  दिए  हैं शेर  को , गलती  से  सब  दाँव !!
70.
कत्ल  हुआ  बाजार में , किस्सा सुनो जदीद !
मिला नहीं उस भीड़ में , एक भी  चश्मदीद !!
71.
करना  बेहद  मान  तुम , है  बस  ये  इसरार !
इतना भी  झुकना  नहीं , गिर  जाए  दस्तार !!
72.
लुटी  आब  को  दाम  दें ,  देख राज का काज !
झुलसे  का  ये  आग  से , करने  लगे  इलाज !!
73.
देते  हैं   हर  बार  हम  , उनको  बढ़िया  भोज !
लेकिन वह पकवान में ,  लेते   कंकड़   खोज !!
74.
यही   लुटेरा  कोष  का , कहे  दरोगा   ढीठ !
पकड़े ककड़ी चोर  को , ठोंके अपनी पीठ !!
75.
दौलत  असर   रसूख  का , ऐसा    हुआ   करार !
पुलिस   हिरासत  से तभी , कातिल हुआ फरार !!
76.
कौर   चोर   के  हाथ  से  , खाकर  बोला  श्वान !
कहीं  नहीं  इस  लूट  का , बाकी   रहे  निशान !!
77.
ढोंगी   बाबा  की   मिली , एक   यही  पहचान !
खुद  करते कुछ  और  हैं , करते और  बखान !!
78.
वन  के  कटते  वृक्ष  ये , कहते  चीख   पुकार !
जन  तू अपने  पैर  पर , नहीं  कुल्हाड़ी   मार !!
79.
रोज  मिले  तुझको  यहाँ , बिन माँगे ही भीख !
एक   बार  तू   भीड़  को , ज़रा हाँकना सीख !!
80.
देख कहीं पर बाढ़ ने , हाल    किया   बेहाल !
और कहीं बरसात ये , बनकर खड़ी  सवाल !!
81.
गर ना  माने  बात  को , मन  चंचल   नादान !
अंकुश  रखना साथ में , कहें जिसे सब ज्ञान !! 
82.
अपना भारत  देश  ये , बने  जगत  सिरमौर !
बस इतनी सी कामना , चाह नहीं कुछ और !!
83.
बातें  माने  ग़ैर  की , खुद  में  नहीं  विवेक !
ऐसे मूरख लोग भी , मिलते  यहाँ   अनेक !!
84.
पाँव  नहीं    हैं   झूठ   के ,  कहता  ये  संसार !
लेकिन फिर भी  दौड़  में , सच जाता  है हार !!
84. 
बदल  बदल कर दल यहाँ , खोते   नेता   मान !
दौड़े     गाड़ी      संग   में ,   जैसे  कोई  श्वान !!
85.
बो  कर  खुश था  बागवाँ , बगिया में  विषबेल !
फली  बेल के  अब   वही , दंश  रहा  है  झेल !!
86.
खाना घर को देख कर , कमा पड़ौसी देख !
बदलेगी फिर देखना , तेरी   करतल   रेख !!
87.
सचमुच अब तो देश से  , गया  राम  का  राज !
सहमी   सी हैं  जानकी , फिरें दशानन  आज !!
88 .
घोल  दिए  हैं  वात  में , हमने    कितने   रोग !
फिरे   वही  ये  बाँटती , फिर काहे  का  सोग !!
89.
ऐब  यही  बस  आप  में ,  झूठा  भरा  ग़रूर  !
मैं   तो  हूँ  इक  आइना , कर  दो  चकनाचूर !!
90.
जाट  कहे  सुन जाटनी , है  खतरे  में  पाग !
 टीवी भी  सिखला रहा , अच्छे  होते  दाग !
91.
जीवन में हम इस तरह , प्रकट करें आभार !
पड़े  हमारी   जीत  का , गले  तुम्हारे  हार !!
92.
मुखर   हुई   जब   लोमड़ी ,  पड़ी   विपद में पाग !
दिया   उसे     तब   शेर  ने ,  अंगूरों     का   बाग !!
93.
देख आजकल जिंदगी , हुई   बहुत    आसान !
आता  घर  के द्वार पर ,  जीने   का   सामान !!
94.
खेत बेच कर मौज  की , छोड़  दिए सब काज !
पैसे   को   मुहताज  वे ,  दर दर  फिरते आज !!
95.
दोष  नहीं  कुछ  आपका , करो कहावत याद !
बिल  ही   तो  है  खोदती , चूहे  की  औलाद !!
96.
प्रेमभाव    घटने    लगा , बढ़ने  लगा   गुमान !
कौन किसी की  मानता , खर्च भले सब ज्ञान !!
97.
उसकी नीयत का करूँ , कितना आज बखान !
जिसने   सबके  सामने , किया  दान  से  दान !!
98.
किया समय  के  यक्ष  ने , ऐसा   कठिन    सवाल !
दूर    मुझे   लगने   लगा ,  सुख सुविधा का ताल !!
99.
कोसो   मत  सरकार को , देखो  अपना खोट !
किस लालच  में डालकर , आए थे तुम  वोट !!
100.
जाने  काले  मेघ  वो , गए  कौन   से   देश !
फिरे सुलगती ये धरा , धर विरहिन का वेश !!
101.
 बच्चे घर की शान हैं , बच्चे ही अभिमान !
उठती बच्चों संग ही , रोज सुबह मुस्कान !!
102.
पल में जाते  रूठ  ये , पल में जाते मान !
बच्चों जैसा क्यों नहीं , बन जाते  इंसान !!
103.
पल में  ये  झगड़ा  करें , पल में जाते  भूल !
साथ सभी फिर खेलते , डाल बात पर धूल !!
104.
माँ के आँचल  में  छुपे , चढ़े बाप की  गोद !
बचपन खातिर है यही , बहुत बड़ा आमोद !!
105.
आँख दिखा गुस्सा करो , चाहे   प्यार   दुलार !
बच्चा  हो   या   आइना ,  झूठ न कहता यार !!
106.
बच्चे जो  भी   ठानते , कर देते  लाचार !
बालक हठ के सामने , सभी गए हैं हार !!
107.
बापू  लौटे  काम  से , अंगों  भरी थकान !
हर लेती पल में  उसे , बच्चों की मुस्कान !!
108.
छोटी  छोटी  हसरतें , थोड़े  से  अरमान !
है बचपन की जेब में , इतना सा सामान !!
109.
लकड़ी  के  घोड़े  चढ़ा , लेकर कागज़ नाव !
देखो   ये  नादान  अब , खोज रहा दरियाव !!
200.
बातें  इनकी  हैं  खरी , निश्चल इनका प्यार !
सबको  भाता है तभी , बच्चों  का   संसार !!
111.
फँसा जाल में आज इक , पंछी  करे    मलाल !
देखो   पापी    पेट      ने , दिया विपद में डाल !!
112.
माना  जिसको  नाखुदा , निकला  धाेखेबाज !
छोड़ गया वह  नाव को , बीच भँवर में आज !!
113.
हुए देश  में आजकल ,  कैसे  शातिर     चोर !
लूटें   शाही  कोष  को ,  मचा  मचा कर शोर !!
114.
बल साहस की बात पर , बोला  एक   अधेड़ !
कब  डरता  है  भेड़िया , हों कितनी भी भेड़ !!
115.
समय मिले कर देखना , संबंधों   पर     शोध !
अपने ही अब क्यों खड़े , बन कर के अवरोध !!
16.
रहा  घूस के  नाम   से , साहेब  को    गुरेज़ !
एक भ्रष्ट अखबार की , खबर सनसनीखेज़ !!
117.
आते   शक   के   दायरे , वही  लोग  अब मीत !
बिन  स्वार्थ के जो  यहाँ ,   रखते   सबसे  प्रीत !!
118.
नुस्खे   लिखता   खूब   था , अपना नीम हकीम !
 बालक  फिर  भी  गाँव  के , होते   रहे   यतीम !!
119.
मुझको ग़ुरबत ने किया , कभी कभी यूँ  दंग !
रोका    खाली   जेब  ने ,  देखो मत  पासंग !!
120.
रिश्वत राधा  सी  हुई ,  डाले  कौन   नकेल !
दफ्तर दफ्तर नाचती , लेकर  नौ मन  तेल !!


राजपाल सिंह गुलिया
गाँव , जाहिदपुर , डाकघर - ऊँटलौधा
 तहसील व जिला  - झज्जर  ( हरियाणा )
                पिन -124103

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