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ग़ज़ल




    ग़ज़ल






हवाओं से   किला हमको  बनाना  ही  नहीं  आया,
हकीकत  से  कभी  नजरें   चुराना  ही  नहीं आया.

हमारी  पीठ  के  पीछे   कहा  था  एक   साथी  ने ,
इसे  देखो  इसे अब  तक  कमाना  ही  नहीं  आया.

खफ़ा  वो  हो  गए  हमसे  बिना  ही  बात के यारो ,
इसे  उनकी  अदा  कह कर  मनाना ही नहीं आया .

रहे  थे  वो हमेशा  ही   मेरी  जद  में  यहाँ  लेकिन ,
निशाना  ये  कभी उन पर  लगाना  ही  नहीं आया .

मिला था भीड़ में कोई मगर फिर खो गया ' गुलिया'
निगाहों  से  उसे  दिल  में  बसाना  ही  नहीं  आया .

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एक ग़ज़ल

ठान लो जो काम करना ,
फिर नहीं आराम करना .

जानता  है  वोट    ही  ये ,
खास   कैसे  आम करना .

प्यार में दिल   हार  जाओ ,
दिल  उसी  के नाम  करना .

रख   छुरी अपनी  बगल में ,
जाप  फिर   तू  राम  करना .

कह   रहा   बाबू   सभी  से ,
काम   मत   बेदाम   करना .

रोड़   है  गर   बाप   का  तो ,
शौक़  से    तू   जाम  करना .

दें   भले    ये     मोल    तेरा ,
खुद  को मत नीलाम करना .

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हरियाणवी ग़ज़ल


काल तक था  लाट  साहब ,
आज   बारह   बाट   साहब .

कह दिया सो कह दिया इब ,
थूक  कै   मत  चाट  साहब .

टेम    म्हारा   भी   कदे  था ,
न्यूं   न  धरती  काट साहब .

खोल कै  सुण कान अपणे ,
बात  नै  मत   काट  साहब .

बेचते      पकवान    फीके ,
खोल   ऊँची   हाट  साहब .

मोल  हो  सै   बात  का  तू ,
क्यूं  गया  इब  नाट साहब ,

कोण  किसनै  खाण  नैं  दे ,
कोण  किसतै  घाट  साहब .

टैम   पै   ना    काम   आए ,
दाम  ले  इब   चाट   साहब .

भोग  ले  या   जोग  ले  ले ,
दिल  कितै  तै  डाट साहब .



हम हिन्दुस्तानी


इतना   तुझको   ख्याल    नहीं ,
घर      है    ये    चौपाल   नहीं .

खेल   रहा      खेल    सियासी ,
मगर  जेब   में     माल     नहीं .

घडियालों   को    फाँस    सके ,
मिलते      ऐसे      जाल   नहीं .

माल    पराया      देख     यहाँ ,
टपके   किसकी    राल    नहीं .

सिर  पर   उतना   कर्ज़   चढ़ा ,
जितने   सिर   पर   बाल  नहीं .

बाँट   रहा   जो   भाग  बराबर ,
होती   उसकी   पड़ताल  नहीं .



वीर   नहीं   हैं  तुझसे  बढ़कर ,
वहम   कभी    ये   पाल  नहीं .

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संपर्क सूत्र :-
   जहादपुर , झज्जर ( हरियाणा 


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