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हिंदी हाइकु (Hindi Haiku )राजपाल सिंह गुलिया



हिंदी हाइकु

जिद को छोड़
प्यार में तू नभ के 
तारे ना तोड़ ।

हरी सी घास 
बिन जल के देखो 
लगे उदास ।

जन्नत चाह 
आत्मघाती सी चुनी 
उसने राह ।

हवा व नीर 
आज प्रदूषण की 
झेलते पीर ।

ओढ़ गगन 
लेटा वो मसखरा 
बिछा ली धरा ।

निकला चोर 
मचाया था जिसने 
बस्ती में शोर ।

ये अच्छे दिन 
पल में लगें बुरे 
आपके बिन ।

धोबी का कुत्ता
यूं है बारह बाट
घर ना घाट ।

साँसों की डोर 
टूटी है जब भी ये 
मिला ना छोर ।

खिलौना खोया 
शिशु रात को खूब 
रोकर सोया ।

बेचते खौफ़
लोग ये हो गए यूँ
अब बेखौफ़ । 

सियासी खेल 
करे अच्छे अच्छों का 
पल में तेल ।


संपर्क सूत्र :-
           राजपाल सिंह गुलिया 
राजकीय प्राथमिक पाठशाला भटेड़ा 
तहसील व जिला - झज्जर 
           ( हरियाणा )

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